वक्फ संशोधन बिल: मुस्लिम समुदाय क्यों कर रहा है विरोध?

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वक्फ संशोधन बिल

भारत सरकार द्वारा लाए गए वक्फ संशोधन बिल, 2022 को लेकर देशभर के मुस्लिम समुदाय में व्यापक विरोध देखने को मिल रहा है। इस बिल के तहत वक्फ बोर्डों के प्रशासन और प्रबंधन में बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, जिसे कई मुस्लिम संगठन और धार्मिक नेता “मुस्लिम अधिकारों में हस्तक्षेप” बता रहे हैं। आइए समझते हैं कि यह बिल क्या है और मुसलमान इसका विरोध क्यों कर रहे हैं।

वक्फ क्या है?

वक्फ इस्लामिक कानून के तहत एक धार्मिक संस्था है, जिसमें मुस्लिम समुदाय द्वारा दान की गई संपत्ति (जमीन, इमारतें, धार्मिक स्थल) को सामाजिक और धार्मिक कार्यों के लिए समर्पित किया जाता है। भारत में वक्फ बोर्ड इन संपत्तियों के प्रबंधन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालते हैं।

वक्फ संशोधन बिल 2022 के प्रमुख प्रावधान

  1. केंद्र सरकार द्वारा वक्फ बोर्ड के चेयरमैन की नियुक्ति – अभी तक राज्य सरकारें वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष का चुनाव करती थीं, लेकिन इस बिल के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार मिल जाएगा।
  2. वक्फ संपत्तियों की जांच के लिए केंद्रीय समिति – केंद्र सरकार एक निगरानी समिति बनाएगी, जो वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन की जांच करेगी।
  3. वक्फ बोर्ड के सदस्यों का कार्यकाल कम करना – बोर्ड सदस्यों का कार्यकाल पांच साल से घटाकर तीन साल करने का प्रस्ताव है।
  4. वक्फ संपत्तियों की बिक्री या लीज पर सख्त नियंत्रण – बिना सरकारी अनुमति के वक्फ संपत्तियों को बेचना या लीज पर देना मुश्किल होगा।

मुस्लिम समुदाय का विरोध क्यों?

  1. धार्मिक स्वायत्तता में हस्तक्षेप – मुस्लिम नेताओं का कहना है कि वक्फ बोर्ड का प्रबंधन मुस्लिम समुदाय का आंतरिक मामला है और सरकार का इसमें दखल देना “धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन” है।
  2. केंद्रीकरण का डर – अभी तक राज्य सरकारें वक्फ बोर्ड को नियंत्रित करती थीं, लेकिन अब केंद्र सरकार के हाथों में अधिकार जाने से मुस्लिम समुदाय को लगता है कि वक्फ संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा
  3. वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग का आरोप – सरकार का कहना है कि वक्फ संपत्तियों का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा और उनमें भ्रष्टाचार है, लेकिन मुस्लिम संगठन इसे “बहाना” बता रहे हैं। उनका मानना है कि सरकार वक्फ जमीनों पर कब्जा करना चाहती है।
  4. संविधान के अनुच्छेद 26 का उल्लंघन – कुछ विद्वानों का तर्क है कि यह बिल अनुच्छेद 26 (धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन का अधिकार) का उल्लंघन करता है।

वक्फ संशोधन बिल को लेकर मुस्लिम समुदाय का विरोध इस बात को लेकर है कि यह उनके धार्मिक और प्रशासनिक अधिकारों में सरकारी दखल बढ़ाता है। सरकार का कहना है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और भ्रष्टाचार रोकने के लिए है, लेकिन मुस्लिम संगठन इसे “सांप्रदायिक एजेंडा” मान रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार और मुस्लिम समुदाय के बीच इस मुद्दे पर कोई समझौता होता है या विरोध और तेज होता है।

एआईएमपीएलबी ने जताई चिंता

अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के वरिष्ठ सदस्यों ने इस विधेयक की आलोचना करते हुए कहा कि संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया। बोर्ड के वरिष्ठ कार्यकारी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने पीटीआई से कहा, “एआईएमपीएलबी और अन्य मुस्लिम संगठनों ने इस विधेयक पर अपनी आपत्तियां जेपीसी के सामने रखीं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि वक्फ संपत्तियों का धार्मिक महत्व इस्लाम के मूल सिद्धांतों जितना ही है, और उनके दर्जे में कोई बदलाव स्वीकार्य नहीं होगा। “हमने सभी सांसदों से मुस्लिम समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए इन संशोधनों को खारिज करने का आग्रह किया है,” उन्होंने कहा।

बरेली से भी उठी आवाज

बरेली के इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा ने इस विधेयक को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। “हम ऐसे किसी भी विधेयक को मंजूरी नहीं दे सकते, न ही संविधान के दायरे से बाहर की किसी चीज का समर्थन कर सकते हैं। हम लोकतांत्रिक तरीकों से वक्फ (संशोधन) विधेयक का विरोध करेंगे,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे को गलत तरीके से पेश कर रही है। “हम पर वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया जाता है, जबकि हमारे पूर्वजों ने अपनी संपत्तियों को वक्फ के नाम समर्पित किया था। कई शासकों ने भी ऐसा ही किया, मंदिर बनवाए और उन्हें संपत्तियां दान कीं। अब उन्हीं संपत्तियों को छीना जा रहा है,” उन्होंने कहा।

मौलाना तौकीर रजा ने आगे कहा कि यह विधेयक मुसलमानों को प्रताड़ित करने और सुधार के नाम पर उनकी जमीनों पर कब्जा करने का षड्यंत्र है। “भाजपा अचानक मुसलमानों का हितैषी कैसे बन गई? यह मुस्लिम हितों के नाम पर सिर्फ धोखा है,” उन्होंने कहा।

‘वक्फ बाई यूजर’ प्रावधान हटाया जाना भी विवाद का कारण

1954 के वक्फ अधिनियम में ‘वक्फ बाई यूजर’ की श्रेणी थी, जिसके तहत कोई संपत्ति वक्फ मानी जाती थी यदि वह लंबे समय से धार्मिक या सामाजिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल हो रही हो, भले ही उसका कोई कानूनी दस्तावेज न हो। लेकिन प्रस्तावित विधेयक में इस प्रावधान को हटा दिया गया है, जिससे ऐसी कई संपत्तियों का दर्जा अनिश्चित हो गया है।

ओवैसी ने कहा– ‘वक्फ बर्बाद विधेयक’

एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह विधेयक मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है। उन्होंने दावा किया कि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा, “इसे वक्फ विधेयक नहीं, बल्कि ‘वक्फ बर्बाद विधेयक’ कहा जाना चाहिए।”

इसके अलावा, विधेयक में केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान है, जिसे मुस्लिम धार्मिक मामलों में दखल बताया जा रहा है। साथ ही, सरकारी अधिकारियों को वक्फ संपत्तियों की जांच का अधिकार दिया गया है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि निर्णय राजनीतिक रूप से प्रभावित होंगे।

कुछ विशेषज्ञों ने दी सीमित समर्थन

हालांकि, कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों का समर्थन किया है। वाराणसी के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि यह विधेयक वक्फ बोर्डों की अनियंत्रित शक्तियों को सीमित करता है, जिसे वे “सकारात्मक कदम” मानते हैं। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ पहलुओं पर और बहस की जरूरत है।

संसद में भी जारी है विरोध

संसद में भी इस विधेयक का विरोध जारी है, और अभी तक कोई द्विदलीय सहमति नहीं बन पाई है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार संशोधनों को लागू करने पर अड़ी हुई है, जबकि विपक्षी दलों ने इसे “असंवैधानिक” और मुस्लिम समुदाय के लिए हानिकारक बताया है।

विधेयक में यह भी प्रावधान है कि किसी भी कानून के तहत मुसलमानों द्वारा स्थापित ट्रस्ट को वक्फ श्रेणी से बाहर रखा जाएगा, ताकि उन पर पूर्ण नियंत्रण रखा जा सके। साथ ही, यह 2013 से पहले के नियमों को फिर से लागू करता है, जिसके अनुसार केवल वे लोग वक्फ के लिए संपत्ति दान कर सकते हैं जो कम से कम पांच साल से मुस्लिम रहे हों। इसके अतिरिक्त, विधेयक में विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और अनाथों के हितों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।

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